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चुनावों में डिंपल यादव से सभाएं कराने की प्रत्याशियों की बढ़ी डिमांड, 2017 की घटना बनी प्रचार से दूर रहने की वजह

चुनावों में डिंपल यादव से सभाएं कराने की प्रत्याशियों की बढ़ी डिमांड, 2017 की घटना बनी प्रचार से दूर रहने की वजह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 5 चरण के मतदान हो चुके है। छठे चरण का मतदान जारी है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि इस बार प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनाएंगे और बीजेपी का सफाया करेंगे। हालांकि अब मतदान का केवल एक चरण (सातवां चरण) बचा है, वही आखिरी इस चरण में सपा प्रत्याशियों की उम्मीद डिंपल यादव से बंधी हुई है।

अब पूर्वांचल में सांतवें चरण की 6 सीटों पर प्रचार करने के लिए प्रत्याशियों की डिमांड आ रही है। प्रत्याशी कह रहे हैं रहे हैं कि इन सीटों पर डिंपल अगर एक बार आकर उनके पक्ष में मतदान करने की अपील कर दें तो उनकी जीत निश्चित हो जाएगी। यूपी चुनाव में पांचवे चरण से सपा-भाजपा में मुकाबला और कड़ा हुआ। अब आखिरी चरण के लिए दोनों पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंकनी शुरू कर दी है। सपा ने अति पिछड़ी जातियों पर खास फोकस करने की रणनीति बनाई है। इसी रणनीति के तहत अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को प्रचार के लिए पांचवें चरण से ही मैदान में उतार दिया है।

2017 की घटना बनी प्रचार से दूर रहने की वजह

सपा सूत्रों के मुताबिक शुरूआत के तीन चरणों तक डिंपल प्रचार से पूरी तरह दूर थीं। वे किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस तक में सामने नहीं आईं। इसके पीछे पिछले चुनाव में प्रचार के दौरान हुई घटनाओं को बड़ी वजह माना जा रहा था। 2017 में हुई एक सभा में डिंपल जब मंच से बोल रही थीं, तो पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ऐसे-ऐसे नारे लगाए कि डिंपल को मंच से ही कहना पड़ा कि चिल्लाओ मत… मुझे डर लगता है।

डिंपल लोगों को शांत रहने की अपील करती रहीं मगर लोग चिल्लाते रहे। बताते हैं कि इस घटना के बाद डिंपल जब-जब अखिलेश यादव के साथ बाहर निकलती। उन्हें देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता। डिंपल की अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं की ऐसी हरकतों के कारण अखिलेश ने चाहकर भी उन्हें प्रचार के लिए चुनावी मैदान में नहीं उतरने दिया। यहां तक कि अखिलेश उन्हें करहल, मैनपुरी, सैफई और इटावा तक नहीं ले गए।

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव के शुरूआती चरणों में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। वहां इन चरणों में जयंत चौधरी, स्वामी प्रसाद मौर्य, ओमप्रकाश राजभर और शिवपाल यादव को आगे रखकर प्रचार कराया गया। करहल, मैनपुरी और इटावा में मुलायम सिंह यादव से भी सभाएं कराई गई। अब आखिरी के चरणों में जिन सीटों पर चुनाव होना है, वहां जयंत का प्रभाव कम है। स्वामी प्रसाद मौर्य और ओपी राजभर अपने प्रभाव वाली सीटों पर प्रचार में लगे हैं। वहीं शिवपाल यादव भी कब क्या कह जाएं अखिलेश इसका भरोसा नहीं कर रहे।

लिहाजा अखिलेश को पूर्वांचल की तमाम सीटों पर सपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए डिंपल को मैदान में उतारना ही पड़ा। इस चुनाव में डिंपल ने पांचवें चरण में प्रयागराज से सपा के पक्ष में वोट करने की अपील की। उनके साथ जया बच्चन भी थीं। जया ने उन्हें छोटी बहू बताया और उनकी वोट की अपील स्वीकार करने को भी कहा। इसके बाद डिंपल सिराथू सीट से चुनाव लड़ रही पल्लवी पटेल के लिए वोट मांगने पहुंची।

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