Agniveer Rohit Singh: उत्तराखंड के टिहरी जनपद से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। भिलंगना ब्लॉक के मेंडू सिंदवालगांव निवासी 21 वर्षीय अग्निवीर रोहित सिंह रावत जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में देश सेवा के दौरान शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
रोहित सिंह की सेना में पहली नियुक्ति 28 अप्रैल 2025 को हुई थी। वह भारतीय सेना की 20 गढ़वाल राइफल्स यूनिट में तैनात थे और देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया।
पार्थिव शरीर पहुंचते ही उमड़ा जनसैलाब
शहीद रोहित सिंह का पार्थिव शरीर जब घनसाली पहुंचा तो स्थानीय लोगों ने नम आंखों से उनका स्वागत किया। “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “रोहित सिंह अमर रहे” जैसे नारों के बीच लोगों ने पुष्प अर्पित कर वीर जवान को श्रद्धांजलि दी।
देर रात जब उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा, तो पूरा गांव गम में डूब गया। बेटे को अंतिम बार देखने के बाद मां और दादी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। परिवार और ग्रामीणों की आंखें नम थीं।
सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
शुक्रवार को बिनपुला घाट पर शहीद रोहित सिंह रावत का पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर वीर सपूत को अंतिम सलामी दी।
अंतिम संस्कार के दौरान प्रशासनिक अधिकारी, क्षेत्रीय विधायक शक्ति लाल शाह, जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। जैसे ही चिता को मुखाग्नि दी गई, वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रोहित सिंह अपने परिवार के बड़े बेटे थे। उनके पिता सुरेंद्र सिंह रोजगार के सिलसिले में दुबई में रहते हैं। बेटे की शहादत की सूचना मिलते ही वह भारत के लिए रवाना हो गए। परिवार में उनके छोटे भाई मोहित भी हैं, जो वर्तमान में नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं।
देश को अपने वीर सपूत पर गर्व
कम उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अग्निवीर रोहित सिंह रावत की शहादत को पूरे उत्तराखंड और देश ने नमन किया है। उनकी वीरता और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।









