TMC Resignation News:West Bengal में चुनावी हार के बाद All India Trinamool Congress के अंदर अब खुलकर नाराजगी दिखाई देने लगी है। पार्टी के कई विधायक और पार्षद अब खुलकर विरोध का रास्ता अपनाते नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी में टूट और बगावत की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
धरने में नहीं पहुंचे कई विधायक
विधानसभा परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास टीएमसी की तरफ से एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पार्टी के 80 विधायकों में से केवल 36 विधायक ही पहुंचे। बड़ी संख्या में विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले 19 मई को कालीघाट में हुई पार्टी बैठक में भी करीब 15 विधायक शामिल नहीं हुए थे। लगातार बैठकों और प्रदर्शनों से दूरी बनाए जाने को पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।
दो नगरपालिकाओं में बड़ा झटका
टीएमसी को सबसे बड़ा नुकसान उत्तर 24 परगना जिले की दो नगरपालिकाओं में हुआ है। कांचरापाड़ा नगरपालिका में पार्टी के 24 पार्षदों में से 15 ने इस्तीफा दे दिया। वहीं हलीशहर नगरपालिका में 23 में से 16 पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपना पद छोड़ दिया। इन इस्तीफों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि ये पार्षद जल्द किसी दूसरी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
आपात बैठक के बाद लिया फैसला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्तीफे का फैसला 17 मई को कल्याणी में हुई एक बैठक के दौरान लिया गया था। इसके बाद 20 मई को हलीशहर नगरपालिका में एक आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में पार्षद राजू साहनी के नेतृत्व में 16 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला किया। इस्तीफा देने वालों में 5 महिला पार्षद भी शामिल हैं। हालांकि नगरपालिका अध्यक्ष शुभंकर घोष ने इस्तीफा नहीं दिया और वह अभी अपने पद पर बने हुए हैं।
भाजपा से बढ़ रही नजदीकी की चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी के विधायक Sudipta Das की भूमिका भी चर्चा में आ गई है। बताया जा रहा है कि हाल ही में उन्होंने नगरपालिका अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उन्होंने इस्तीफा देने वाले पार्षदों की सूची भी जारी की है। सुदीप्त दास ने कहा कि जनता को घबराने की जरूरत नहीं है और नगरपालिका की सेवाएं पहले की तरह चलती रहेंगी। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं कि इस्तीफा देने वाले कई पार्षद भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
टीएमसी के सामने बढ़ी चुनौती
लगातार हो रहे इस्तीफों और नेताओं की नाराजगी ने टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी अब खुद को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटी है, लेकिन अंदरूनी कलह उसकी सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।






