Ambedkarnagar Coin Security Case:उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां सिर्फ आठ पुराने चांदी के सिक्कों की सुरक्षा के लिए पिछले पांच साल से तीन पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी कर रहे हैं। सुनने में यह अजीब लगता है, लेकिन यह पूरी तरह सच है। इन सिक्कों की रखवाली पर हर महीने करीब तीन लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
कहां से मिले ये सिक्के
यह मामला आलापुर तहसील के राजेसुल्तानपुर इलाके का है। यहां चांडीपुर कला गांव में राजा मोरध्वज का किला स्थित है। करीब आठ साल पहले, किले के पास एक खेत में मिट्टी की खुदाई हो रही थी। उसी दौरान जमीन से आठ पुराने सिक्के मिले, जो देखने में चांदी के लगते हैं। इसके बाद पुलिस ने इन सिक्कों को कब्जे में लेकर उप कोषागार में जमा कर दिया था।
कोषागार बंद, लेकिन ड्यूटी जारी
करीब पांच साल पहले सरकार ने तहसीलों के उप कोषागार बंद कर दिए थे। इसके बाद वहां के कर्मचारी और जरूरी कागजात जिला मुख्यालय भेज दिए गए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस जर्जर इमारत में यह उप कोषागार था, वहीं अब भी तीन पुलिसकर्मी इन सिक्कों की सुरक्षा में तैनात हैं।
तीन पुलिसकर्मी कर रहे निगरानी
पुलिस लाइंस से राकेश वर्मा, विशाल पाल और रामानंद यादव की ड्यूटी यहां लगी हुई है। ये तीनों 24 घंटे सिक्कों की सुरक्षा करते हैं। पहले यहां चार पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन अब संख्या घटाकर तीन कर दी गई है। इसके बावजूद खर्च लगातार हो रहा है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
अब क्या कहता है प्रशासन
वरिष्ठ कोषाधिकारी बृजलाल का कहना है कि हाल ही में इन सिक्कों को जिला मुख्यालय के कोषागार में मंगवाकर सुरक्षित रखवा दिया गया है। साथ ही, यहां से पुलिस हटाने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है और आगे के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।
पुरातत्व विभाग में जमा करने की प्रक्रिया
इन सिक्कों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अयोध्या कार्यालय में जमा कराने की भी कोशिश की गई थी। लेकिन जिन अधिकारी ने इन्हें सील किया था, उनके मौजूद न होने की वजह से सिक्के वापस कर दिए गए। अब उस अधिकारी को बुलाकर दोबारा प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है।
स्थानीय प्रशासन भी असमंजस में
आलापुर के तहसीलदार पद्मेश श्रीवास्तव का कहना है कि तिजोरी में क्या रखा है, इसकी पूरी जानकारी उन्हें भी नहीं है। हालांकि, कुछ सामान को शिफ्ट करने और पुलिसकर्मियों को हटाने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। इस पर अभी भी कागजी प्रक्रिया चल रही है।
