Azamgarh Family Tragedy:आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में हुई दर्दनाक घटना के बाद 23 सितंबर को ऐसा मंजर सामने आया, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। अरविंद सिंह, उसकी पत्नी बबीता और उनके बेटे की मौत के बाद तीनों की अर्थियां एक साथ राजघाट शवदाह गृह पहुंचीं। परिवार में अंतिम संस्कार के लिए कोई पुरुष सदस्य नहीं बचा था। ऐसे में अरविंद की भतीजी कुमारी वर्षा ने चाचा, चाची और चचेरे भाई को मुखाग्नि दी।
तीन अर्थियां साथ पहुंचीं
राजघाट शवदाह गृह में तीनों शव एक साथ पहुंचे तो वहां मौजूद परिजन और स्थानीय लोग भावुक हो गए। वर्षा ने आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। इस परिवार पर कुछ ही घंटों में आई त्रासदी का असर अंतिम विदाई के दौरान साफ दिखाई दिया।
पहले हुई तीन हत्याएं
दरअसल, 22 सितंबर की शाम अहरौला क्षेत्र के शंभूपुर गांव में घर पर पूजा चल रही थी। इसी दौरान अरविंद सिंह का पूजा कराने आए दो पुजारियों से विवाद हो गया। पुलिस के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर अरविंद ने लाइसेंसी हथियार से फायरिंग की। इसमें उसकी पत्नी बबीता और दोनों पुजारी महेंद्र पाठक व अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई।
इसके बाद अरविंद अपने तीन बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया। उसने बच्चों को बाहर नहीं आने दिया और पुलिस को भी धमकियां दीं।
सात घंटे चला ऑपरेशन
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने घर को घेर लिया। वरिष्ठ अधिकारी और कई पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस लगातार अरविंद से बातचीत कर उसे सरेंडर करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए समझाती रही।
करीब सात से आठ घंटे तक बातचीत चलती रही, लेकिन अरविंद बाहर आने को तैयार नहीं हुआ। पुलिस के मुताबिक, वह बच्चों को अपने साथ रखकर बाहर आने से इनकार कर रहा था।
कमरे से चली गोली
देर रात कमरे के अंदर से अचानक गोली चलने की आवाज आई। पुलिस को आशंका हुई कि बच्चों में से किसी को गोली लगी है। इसके बाद पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया और दरवाजा तोड़कर कमरे में प्रवेश किया।
पुलिस के मुताबिक, टीम के अंदर पहुंचते ही अरविंद ने फायरिंग शुरू कर दी। उसके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी और उसने कई गोलियां चलाईं। जवाबी फायरिंग में अरविंद घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
बेटे की भी हुई मौत
रेस्क्यू के दौरान पुलिस को अरविंद का बेटा गोली लगने से घायल मिला। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, बच्चे को गोली अरविंद की ओर से चली फायरिंग में लगी थी। इस तरह घटना में अरविंद, उसकी पत्नी और बेटे समेत कुल पांच लोगों की मौत हुई।
अरविंद की दो बेटियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल में भर्ती कराया। दोनों को लंबे समय तक कमरे में रहने के कारण इलाज और निगरानी में रखा गया।
पुरानी हत्या का भी जिक्र
इस घटना की पृष्ठभूमि में अरविंद के बड़े भाई की पुरानी हत्या का भी जिक्र सामने आया है। अलग-अलग रिपोर्टों में इस हत्या का साल 2018 या 2019 बताया गया है। बताया गया कि भाई की मौत के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए घर में पूजा-पाठ कराया जा रहा था। इसी पूजा को लेकर अरविंद की आपत्ति और पुजारियों से विवाद की बात सामने आई है।
हालांकि, पुरानी हत्या और 22 सितंबर की वारदात के बीच संबंध को लेकर पुलिस जांच के तथ्यों को अंतिम रूप से सामने आना बाकी है।
अंतिम विदाई में उमड़ा दर्द
एक तरफ परिवार ने 22 सितंबर की घटना में कई सदस्यों को खोया, वहीं अगले दिन तीन शवों की अंतिम विदाई ने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। परिवार में कोई पुरुष सदस्य उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्षा ने अपने चाचा, चाची और चचेरे भाई का अंतिम संस्कार किया।
यह दृश्य उस घटना के अंतिम और बेहद भावुक पड़ाव के रूप में सामने आया, जिसमें कुछ ही घंटों के भीतर एक परिवार के कई सदस्यों की जान चली गई।








