Kanpur gangrape case: कानपुर के सचेंडी इलाके में हुई गैंगरेप की घटना ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए दो वीडियो ने इस मामले में पुलिसिया मिलीभगत की पोल खोलकर रख दी है। इन वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि जिस दारोगा अमित मौर्य पर पीड़िता ने गैंगरेप का आरोप लगाया है, वही चौकी के भीतर पीड़िता और उसके भाई से पूछताछ कर रहा है। शर्मनाक बात यह है कि पूछताछ के दौरान कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी और आरोपी दारोगा पीड़िता को डराने और गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। Kanpur पुलिस की इस लापरवाही ने न केवल कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि न्याय प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गहरा दाग लगा दिया है।
वायरल वीडियो की हकीकत
सोशल मीडिया पर वायरल हुए 2 मिनट 8 सेकंड और 2 मिनट 42 सेकंड के इन वीडियो में भीमसेन पुलिस चौकी Kanpur का दृश्य है। वीडियो में मुख्य आरोपी दारोगा अमित मौर्य कुर्सी पर बैठा है, जबकि सहमी हुई पीड़िता और उसका भाई सामने खड़े हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि पीड़िता का भाई बार-बार घटना स्थल पर मौजूद काली स्कॉर्पियो और आरोपियों की पहचान कर रहा है, लेकिन दारोगा उसे यह कहकर गुमराह कर रहा है कि “हो सकता है कोई और हो।”
सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आता है जब जेल भेजा गया आरोपी शिवबरन भी वहीं खड़ा नजर आता है। पीड़िता के भाई द्वारा पहचान लिए जाने पर शिवबरन उसे सरेआम गाली देता है और धमकाता है, लेकिन वहां मौजूद अन्य पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहते हैं। आरोपी दारोगा अमित मौर्य चुपके से पीड़िता का वीडियो भी बनवा रहा था, जो उसकी दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।
फरार दारोगा और पुलिस की सुस्ती
घटना के बाद से ही आरोपी दारोगा अमित मौर्य फरार है। हालांकि पुलिस का दावा है कि उसकी तलाश में चार टीमें लगाई गई हैं, लेकिन अभी तक उसके हाथ खाली हैं। सूत्रों के अनुसार, अमित मौर्य गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी दांवपेच चल रहा है और सोमवार को हाईकोर्ट में उसकी ‘अरेस्ट स्टे’ याचिका पर सुनवाई होनी है। पीड़िता के परिवार का आरोप है कि रसूखदार सरपरस्त उसे बचाने में लगे हैं।
न्याय की गुहार
पीड़िता के भाई ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भावुक अपील की है कि आरोपी दारोगा को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जाए। परिवार का कहना है कि आरोपी के खुलेआम घूमने से पीड़िता दहशत में है। हालांकि वर्तमान में परिवार को सुरक्षा प्रदान की गई है, लेकिन वायरल वीडियो ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शुरुआती जांच में Kanpur पुलिस ने आरोपियों को बचाने और साक्ष्यों को प्रभावित करने का हर संभव प्रयास किया था।









