Lucknow Fire Tragedy Story: लखनऊ के अलीगंज स्थित सेक्टर-एच की एक व्यावसायिक इमारत में लगी भीषण आग ने 15 परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। वीडियो गेमिंग और 3डी एनीमेशन कंपनी में काम करने वाले युवा कर्मचारी इस हादसे का शिकार हो गए। मरने वालों की उम्र 18 से 30 वर्ष के बीच थी। कोई परिवार का इकलौता बेटा था, कोई अपनी बहनों का सहारा था, तो किसी की शादी की तैयारियां चल रही थीं।
धुएं ने बनाया मौत का जाल
हादसे से बची कर्मचारी लवप्रीत कौर ने बताया कि दोपहर के समय अचानक पूरे ऑफिस में धुआं फैलने लगा। कुछ ही मिनटों में सांस लेना मुश्किल हो गया। इसी बीच बिजली चली गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया। उन्होंने बताया कि सीढ़ियां दिखाई नहीं दे रही थीं। किसी ने खिड़की खुली होने की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने बाहर निकली पाइप का सहारा लेकर नीचे उतरकर अपनी जान बचाई। इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं।
पाइप बनी आखिरी उम्मीद
कंपनी के प्रोडक्शन हेड भूवन श्रीवास्तव भी उसी पाइप के सहारे बाहर निकल सके। उन्होंने बताया कि कुछ ही समय में धुआं इतना घना हो गया था कि कुछ भी दिखाई देना बंद हो गया। उन्होंने दो साथियों को नीचे उतारने में मदद की, लेकिन अपने चचेरे भाई आदित्य श्रीवास्तव को नहीं बचा सके। एक अन्य कर्मचारी मोहम्मद आसिफ ने बताया कि शुरुआत में सभी को लगा कि आग मामूली है, लेकिन देखते ही देखते पूरा गलियारा धुएं से भर गया।
आखिरी फोन कॉल ने रुलाया
इस हादसे की सबसे दर्दनाक याद वे आखिरी फोन कॉल हैं, जो फंसे हुए युवाओं ने अपने परिवारों को किए थे। बाराबंकी के शाहजान ने अपने पिता को फोन कर बार-बार कहा, “पापा, मुझे बचा लो।” लेकिन परिवार चाहकर भी कुछ नहीं कर सका। इसी तरह गेम डिजाइनर सुखमणि सिंह ने भी अपने पिता से आखिरी बार मदद की गुहार लगाई थी।
शादी के सपने अधूरे रह गए
कंपनी में साथ काम करने वाले नीलेश और अनामिका सामंत एक-दूसरे को पसंद करते थे और जल्द शादी करने वाले थे। लेकिन इस हादसे ने दोनों की जिंदगी छीन ली। परिवारों ने कभी नहीं सोचा था कि शादी की तैयारियों की जगह अंतिम संस्कार की तैयारी करनी पड़ेगी।
कई घरों के बुझ गए चिराग
हरियाणा के सोनीपत निवासी भविष्य शर्मा नौकरी जॉइन करने के कुछ दिन बाद ही इस हादसे का शिकार हो गए। वह अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। अब्दुल रहमान और शाहजान भी अपने परिवारों की बड़ी उम्मीद थे। उनकी मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
हादसे से बचे कर्मचारियों का आरोप है कि इमारत में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। छत पर जाने का रास्ता बंद था और वहां ताला लगा हुआ था। कई लोगों का कहना है कि मदद पहुंचने में भी देरी हुई। इस हादसे ने केवल 15 जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि कई परिवारों के सपने, उम्मीदें और भविष्य भी छीन लिया।









