बुलडोजर से पहले जागे ग्रामीण: संभल में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मदीना मस्जिद खुद हटाई

उत्तर प्रदेश के संभल में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्मित मदीना मस्जिद और मदरसे को ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्रवाई से पहले ही खुद ध्वस्त कर दिया। न्यायालय के आदेश और भारी जुर्माने के बाद यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

Sambhal illegal mosque demolition

Sambhal illegal mosque demolition: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के सलेमपुर सलार गांव में कानून के अनुपालन की एक अनूठी मिसाल देखने को मिली है। यहाँ लगभग पौने चार बीघा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई ‘मदीना मस्जिद’ और मदरसे को गांव वालों ने बुलडोजर कार्रवाई से पहले ही स्वयं ढहा दिया। तहसीलदार न्यायालय द्वारा बेदखली के आदेश और 7.78 लाख रुपये का जुर्माना लगाए जाने के बाद, प्रशासन ने 3 जनवरी तक की समयसीमा निर्धारित की थी। कार्रवाई के डर और कानूनी सम्मान को देखते हुए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद ही फावड़े उठाकर अवैध निर्माण को हटा लिया। अब इस मुक्त कराई गई भूमि पर प्रशासन द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लोगों को पट्टे आवंटित किए जा रहे हैं।

Sambhal illegal mosque demolition

कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि

इस Sambhal मामले की शुरुआत 14 जून, 2018 को हुई थी, जब क्षेत्रीय लेखपाल ने एक रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के अनुसार, गांव सलेमपुर सलार निवासी हाजी शमीम ने ग्राम सभा की सुरक्षित भूमि पर अवैध कब्जा कर मस्जिद और मदरसे का निर्माण कराया था। यह जमीन वास्तव में गांव के निर्धन और भूमिहीन परिवारों के लिए आवंटित की जानी थी। इस रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार न्यायालय में ‘ग्राम सभा बनाम हाजी शमीम’ का वाद दर्ज किया गया।

न्यायालय का फैसला और जुर्माना

लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद, 2 दिसंबर 2025 को न्यायालय ने पुष्टि की कि निर्माण पूरी तरह अवैध है। कोर्ट ने न केवल जमीन खाली करने का आदेश दिया, बल्कि मुतवल्ली हाजी शमीम पर 7.78 लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि तय समय सीमा (3 जनवरी) तक अतिक्रमण नहीं हटा, तो प्रशासन अपने स्तर पर बुलडोजर चलाकर कार्रवाई करेगा।

प्रशासन की मौजूदगी में स्वतः ध्वस्तीकरण

निर्धारित समय पर जब तहसीलदार धीरेंद्र प्रताप सिंह प्रशासनिक टीम और भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे, तो वहां का नजारा बदला हुआ था। ग्रामीणों ने कानून का सम्मान करते हुए मस्जिद के ढांचे को पहले ही काफी हद तक हटा दिया था। तहसीलदार ने बताया कि जब टीम बुलडोजर लेकर पहुँची, तो पाया कि अवैध निर्माण पूरी तरह से तोड़ा जा चुका था।

भूमि का भविष्य और जनहित

Sambhal प्रशासन ने अब इस 439 वर्ग मीटर और आसपास की कुल पौने चार बीघा जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य गरीबों के हक की जमीन को वापस दिलाना है। अधिकारियों के अनुसार, इस जमीन पर अब गांव के उन पात्र लोगों को पट्टे दिए जा रहे हैं जो आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर हैं, ताकि वे अपने आवास का निर्माण कर सकें।

यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ प्रशासनिक सख्ती और सामुदायिक सहयोग के मेल से एक लंबे विवाद का अंत हुआ है।

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