Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता लाने और बिचौलियों को खत्म करने के लिए ‘एग्रीस्टैक’ ) पहल के तहत फार्मर आईडी को अनिवार्य कर दिया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के सभी पात्र किसानों का पंजीकरण 31 मई 2026 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
1 जून से बदल जाएंगे नियम
01 जून 2026 से खेती-किसानी से जुड़ी सभी सरकारी सेवाओं के लिए केवल फार्मर आईडी ही एकमात्र आधार होगी। इसके बिना निम्नलिखित लाभ नहीं मिल सकेंगे:
* MSP पर फसल बिक्री: न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए यह आईडी जरूरी होगी।
* खाद और बीज: खाद की खरीद पर पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के लिए आईडी अनिवार्य है।
* सरकारी सब्सिडी: कृषि यंत्रों या अन्य योजनाओं पर मिलने वाली सब्सिडी सीधे इसी आईडी से लिंक होगी।
* PM किसान योजना: पीएम किसान और फसल बीमा जैसे लाभ पाने के लिए यह डिजिटल पहचान आवश्यक है।
क्या है फार्मर आईडी?
यह आधार कार्ड की तरह ही किसानों की एक विशिष्ट डिजिटल पहचान है। इसमें किसान का पूरा ब्यौरा एक जगह उपलब्ध होगा:
1. भूमि रिकॉर्ड: किसान की जमीन का पूरा विवरण।
2. फसल विवरण: किसान अपने खेत में कौन सी फसल उगा रहा है।
3. बैंक खाता: सब्सिडी और भुगतान के लिए आधार-लिंक्ड बैंक डिटेल्स।
घर-घर जाकर बनाई जा रही है आईडी
उत्तर प्रदेश सरकार ने 2.88 करोड़ से अधिक किसानों को इस नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है:
* जागरूकता अभियान: गांवों में किसान गोष्ठी, चौपाल, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
* सहायता: किसान अपने नजदीकी कृषि अधिकारी, कृषि मित्र, ग्राम सचिव या रोजगार सहायक की मदद से आईडी बनवा सकते हैं।
* ऑनलाइन पोर्टल: किसान खुद भी संबंधित पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी अपडेट कर सकते हैं।








