Uttar Pradesh: National Crime Records Bureau ताजा रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों में अपराधियों को सजा दिलाने के मामले में देश के बड़े राज्यों में पहला स्थान हासिल किया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की कन्विक्शन रेट 76.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जो देश में सबसे बेहतर मानी जा रही है। इस दौरान राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 21,169 आरोपियों को दोषी ठहराया गया।राज्य की अदालतों ने वर्ष 2024 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े 27,639 मामलों की सुनवाई पूरी की, जो देश में सबसे अधिक है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता Yogi Adityanath सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, मजबूत अभियोजन तंत्र और फास्ट ट्रैक अदालतों के कारण संभव हो सकी है।
बड़े राज्यों में यूपी का बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट के मुताबिक जहां उत्तर प्रदेश ने सजा दिलाने में मजबूत प्रदर्शन किया, वहीं West Bengal का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। पश्चिम बंगाल में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा दिलाने की दर केवल 1.6 प्रतिशत दर्ज की गई।
दिलचस्प बात यह है कि उत्तर प्रदेश में 92.1 प्रतिशत मामलों के लंबित होने के बावजूद सजा दिलाने की दर बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों की तुलना में काफी बेहतर रही।
बच्चों के यौन उत्पीड़न में चौंकाने वाला खुलासा
एनसीआरबी की रिपोर्ट में बच्चों से जुड़े यौन अपराधों को लेकर भी गंभीर आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट बताती है कि बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों में अधिकतर आरोपी उनके अपने परिचित, रिश्तेदार या करीबी होते हैं।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2024 के दौरान POCSO Act के तहत दर्ज 3,671 मामलों का अध्ययन किया गया। इनमें से 3,581 मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के परिचित निकले, जो कुल मामलों का 97.5 प्रतिशत है। केवल 90 मामलों में आरोपी अज्ञात पाए गए।
रिश्तेदार और दोस्त बने अपराधी
रिपोर्ट के अनुसार, 329 मामलों में आरोपी परिवार के सदस्य थे, जबकि 1,595 मामलों में आरोपी रिश्तेदार, पड़ोसी, नियोक्ता या अन्य परिचित थे। वहीं 1,657 मामलों में आरोपी दोस्त, लिव-इन पार्टनर या शादी का झांसा देकर संबंध बनाने वाले लोग थे।
ये आंकड़े बताते हैं कि खासकर किशोरियां उन लोगों द्वारा ज्यादा शोषण का शिकार हो रही हैं, जिनसे उनका रोजमर्रा का संपर्क होता है।
किशोरियों पर सबसे ज्यादा खतरा
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में पॉक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के तहत कुल 3,672 पीड़ित दर्ज किए गए। इनमें 3,571 लड़कियां और 101 लड़के शामिल थे।
सबसे ज्यादा पीड़ित 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग में पाए गए। 16 से 18 वर्ष की उम्र में 1,181 पीड़ितों में 1,173 लड़कियां थीं, जबकि 12 से 16 वर्ष आयु वर्ग में 1,759 पीड़ितों में 1,721 लड़कियां शामिल थीं।








