UP Youth Skill Development:उत्तर प्रदेश के युवाओं को आधुनिक कंपनियों की जरूरत के हिसाब से तैयार करने के लिए योगी सरकार ने नई पहल शुरू की है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन यानी UPSDM और इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन यानी IIA के बीच गुरुवार को समझौता हुआ। इसका मकसद युवाओं को सिर्फ किताबी पढ़ाई तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सीधे उद्योग, नौकरी और अप्रेंटिसशिप से जोड़ना है। इस मौके पर प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम और मिशन निदेशक पुलकित खरे मौजूद रहे।
ट्रेनिंग होगी प्रैक्टिकल
इस योजना के तहत युवाओं को असली काम का अनुभव देने पर जोर रहेगा। IIA से जुड़े कारोबारी प्रशिक्षण केंद्रों को जरूरी कच्चा सामान उपलब्ध कराएंगे। इससे प्रशिक्षण लेने वाले युवा वास्तविक औद्योगिक प्रोजेक्ट पर काम कर सकेंगे। उद्योगों के अनुभवी लोग प्रशिक्षण केंद्रों पर जाकर गेस्ट लेक्चर और मेंटरशिप भी देंगे। इसके साथ युवाओं को सॉफ्ट स्किल्स, काम करने का तरीका और नई तकनीक की जानकारी भी दी जाएगी।
नौकरी का सीधा मौका
युवाओं को नौकरी से जोड़ने के लिए IIA के ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर रोजगार मेले, अप्रेंटिसशिप मेले और औद्योगिक भ्रमण कराए जाएंगे। इससे युवाओं को कंपनियों के कामकाज को करीब से समझने और रोजगार के अवसर तलाशने में मदद मिलेगी। IIA के क्षेत्रीय पदाधिकारियों को जिलों की कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों से जोड़ा जाएगा, ताकि स्थानीय कंपनियों की जरूरत और प्रशिक्षित युवाओं के बीच बेहतर तालमेल बन सके।
8 जिलों से शुरुआत
पहले चरण में यह मॉडल आठ प्रमुख औद्योगिक और कारोबारी क्षेत्रों में लागू किया जाएगा। इनमें लखनऊ, बाराबंकी, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, अमेठी, वाराणसी, एनसीआर क्षेत्र यानी गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद तथा बरेली शामिल हैं। योजना सफल रहने पर इसे उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों तक ले जाने की तैयारी है। इससे छोटे शहरों और जिलों के युवाओं को भी स्थानीय उद्योगों से जुड़ने का मौका मिल सकेगा।
तीन साल की साझेदारी
UPSDM और IIA के बीच यह तीन साल का गैर-वित्तीय समझौता है। योजना की निगरानी के लिए एक संयुक्त समन्वय समिति बनाई जाएगी। यह समिति हर तीन महीने में बैठक करेगी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता, अप्रेंटिसशिप, प्लेसमेंट तथा युवाओं को मिले रोजगार की स्थिति की समीक्षा करेगी। इस तरह सरकार का लक्ष्य सिर्फ प्रशिक्षण देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि प्रशिक्षण के बाद कितने युवाओं को वास्तव में नौकरी या अप्रेंटिसशिप मिली।







