भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को शानदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। वहीं, अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगने का असर भी बाजार की चर्चा में रहा।
सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी
बुधवार सुबह 9 बजकर 59 मिनट पर बीएसई सेंसेक्स 368 अंकों से ज्यादा यानी 0.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,287.91 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 भी 95.91 अंक यानी 0.40 प्रतिशत चढ़कर 23,906.75 पर कारोबार कर रहा था।
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लिया और रिपब्लिकन पार्टी से नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इस चुनावी नतीजे को भी वैश्विक बाजार के माहौल से जोड़कर देखा जा रहा है।
विदेशी निवेशकों की वापसी
भारतीय शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की खरीदारी भी है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में निफ्टी 50 और सेंसेक्स में करीब पांच प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। मंगलवार को दोनों सूचकांक दो महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुए थे।
कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने भी बाजार को सहारा दिया है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों का भरोसा भारतीय शेयर बाजार में फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने मंगलवार को भारतीय शेयरों में 68.37 अरब रुपये यानी करीब 721.66 मिलियन डॉलर की शुद्ध खरीदारी की। पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच दिन विदेशी निवेशकों ने बाजार में पैसा लगाया है।
कच्चे तेल की कीमतों से राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी भारतीय शेयर बाजार को मजबूती दी है। यूक्रेन और ईरान में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच बुधवार को ब्रेंट क्रूड वायदा करीब 103 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
पिछले कारोबारी सत्र में इसकी कीमत करीब चार सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गई थी। ऊर्जा कीमतों में कमी से भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों को राहत मिलने की उम्मीद रहती है।
वैश्विक बाजारों में दबाव
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी, ऊर्जा कीमतों में नरमी और टैक्स नीतियों में संभावित बदलाव की उम्मीद भारतीय बाजार के माहौल को मजबूत कर सकती है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तस्वीर कुछ अलग रही। एशियाई बाजारों में करीब 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी शेयर वायदा भी हल्की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहे थे। इसके बावजूद भारतीय बाजार में तेजी बनी रही।






















