Khadi Industry: चरखे और हथकरघे से तैयार होने वाली खादी अब सिर्फ पारंपरिक कपड़े तक सीमित नहीं रहेगी। बदलते समय और लोगों की पसंद को देखते हुए खादी के डिजाइन, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता में बदलाव करने की तैयारी है। कोशिश है कि खादी अपनी पुरानी पहचान को बनाए रखते हुए आज के युवाओं की पसंद भी बने।
मंगलवार को खादी व ग्रामोद्योग बोर्ड के सभागार में खादी से जुड़ी 63 संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इस बैठक में खादी को आधुनिक तकनीक और नए डिजाइन से जोड़ने के साथ उसकी मार्केटिंग और ब्रांडिंग को मजबूत करने पर चर्चा की गई।
परंपरा के साथ आधुनिकता का मेल
बैठक में ‘परंपरा से प्रगति की ओर, भविष्य बुनती खादी’ विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें प्रदेश में खादी की मौजूदा स्थिति का आकलन किया गया और यह समझने की कोशिश की गई कि आज के बाजार और ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से खादी में किस तरह के बदलाव किए जा सकते हैं।
खादी की पहचान और उसकी पारंपरिक खासियत को बनाए रखते हुए कपड़ों के डिजाइन, पैकेजिंग और गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया। इसके साथ ही ब्रांडिंग और मार्केटिंग को मजबूत करने के लिए खादी संस्थाओं से सुझाव भी लिए गए।
युवाओं को जोड़ने की तैयारी
खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि खादी को आगे बढ़ाने के लिए खादी संस्थानों, युवाओं, कारीगरों और उद्योग जगत के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उनका जोर इस बात पर रहा कि खादी के पुराने और खास स्वरूप को बनाए रखते हुए ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएं, जिन्हें युवा और नए ग्राहक भी पसंद करें।
आज के समय में लोग कपड़े खरीदते समय डिजाइन, गुणवत्ता और पैकेजिंग पर भी ध्यान देते हैं। ऐसे में खादी को आधुनिक रूप देने की कोशिश की जा रही है, ताकि यह बदलते फैशन के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सके।
देश-विदेश के बाजार में पहुंचाने की योजना
खादी की बेहतर ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए इसे दूसरे राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की योजना है। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता और प्रस्तुति को बेहतर बनाने पर काम किया जाएगा।
बैठक में खादी संस्थाओं ने क्षेत्रीय स्तर पर आने वाली समस्याओं के बारे में भी जानकारी दी और उनके समाधान के लिए अपने सुझाव साझा किए। अधिकारियों ने इन सुझावों पर आगे काम करने की बात कही।









