NEET Exam And New Education Policy: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी परीक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि देश के बच्चे शिक्षा माफिया और पेपर लीक करने वाले गिरोहों के जाल में फंसें। इसी वजह से सरकार को परीक्षा रद्द करने जैसा बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 21 जून को होने वाली परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी गड़बड़ी के कराई जाएगी।
बच्चों की परेशानी को समझती है सरकार
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश के करीब 22 लाख छात्रों को मानसिक तनाव और परेशानी का सामना करना पड़ा है। सरकार इस दर्द को समझती है और अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि कुछ कठिन फैसले लेने जरूरी थे ताकि किसी भी छात्र का भविष्य खराब न हो।
पेपर माफिया पर सख्त संदेश
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि पेपर लीक करने वाले गिरोह छात्रों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ करें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय उसका समाधान निकाले। इसी सोच के साथ परीक्षा व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने पर काम किया जा रहा है।
नई शिक्षा नीति पर भी बोले प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संबोधन में नई शिक्षा नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत की पुरानी ज्ञान परंपरा, कश्मीर की सरस्वती संस्कृति, पुरी के जगन्नाथ मंदिर और कोणार्क सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था को फिर से भारतीय संस्कृति और ज्ञान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मातृभाषा में पढ़ाई पर जोर
उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा 5 तक बच्चों को मातृभाषा में पढ़ाने पर जोर दिया गया है। वहीं कक्षा 10 तक तीन भाषाएं पढ़ाने की योजना बनाई गई है। उनका मानना है कि बच्चे अपनी भाषा में बेहतर तरीके से सीख और समझ सकते हैं।
विदेशी भाषाएं सीखने की भी सलाह
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जो छात्र विदेशों में व्यापार करना चाहते हैं या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करना चाहते हैं, उन्हें विदेशी भाषाएं सीखनी चाहिए। हालांकि उन्होंने साफ किया कि किसी पर भी विदेशी भाषा थोपी नहीं जानी चाहिए। भारतीय भाषाओं को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।
भारत बन रहा ग्लोबल साउथ की आवाज
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत अब ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बन चुका है। उन्होंने कहा कि दुनिया भारत से कम लागत वाले उत्पादन, रिसर्च और इनोवेशन की उम्मीद कर रही है। इसके लिए देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो नए विचार लेकर आगे आएं।
डिग्री नहीं, हुनर जरूरी
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि अब शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहिए। छात्रों में कौशल और क्षमता विकसित करना ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा कि रिसर्च और पीएचडी को भी देश की मौजूदा जरूरतों और समस्याओं से जोड़ना होगा। तभी भारत दुनिया में मजबूत पहचान बना सकेगा।







