NEET Paper Leak: करोड़ों के गुप्त सौदे ,छात्रों के परिवारों तक पहुंची CBI जांच, कई अभिभावकों से पूछताछ, बच्चों लिए पेपर खरीदने का शक

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की जांच अब छात्रों के परिवारों तक पहुंच गई है। एजेंसी को शक है कि कुछ अभिभावकों ने मेडिकल एडमिशन के लिए लाखों रुपये देकर लीक हुआ पेपर खरीदा था।

NEET UG 2026 Paper Leak Investigation: NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच लगातार गहरी होती जा रही है। अब इस मामले में जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation की नजर उन परिवारों पर भी है, जिन पर लीक हुए प्रश्नपत्र खरीदने का शक है। जानकारी के अनुसार, CBI की आठ अधिकारियों की टीम ने शनिवार और रविवार को महाराष्ट्र के कई इलाकों में छापेमारी की। इनमें नांदेड़ के विद्युत नगर इलाके का एक घर और लातूर की कुछ जगहें शामिल हैं। जांच एजेंसी को जानकारी मिली थी कि कुछ अभिभावकों ने अपनी बेटियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए लीक हुआ पेपर हासिल किया था।

5 से 10 लाख रुपये देने का आरोप

अधिकारियों को शक है कि परीक्षा से पहले पेपर पाने के लिए बिचौलियों को 5 से 10 लाख रुपये तक दिए गए थे। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह नेटवर्क सिर्फ पेपर लीक करने वालों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें पैसे देकर फायदा लेने वाले लोग भी शामिल थे। CBI के मुताबिक कुछ आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों ने अपने बच्चों के एडमिशन के लिए बड़ी रकम खर्च की थी। जांच एजेंसी अब पैसों के पूरे लेन-देन की जांच कर रही है।

घंटों तक हुई पूछताछ

CBI की टीम शुक्रवार को नांदेड़ पहुंची थी। वहां उस छात्रा के माता-पिता से पूछताछ की गई, जिसने 3 मई को NEET परीक्षा दी थी। अधिकारियों के मुताबिक उनसे करीब आठ घंटे तक सवाल-जवाब किए गए। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और मोबाइल रिकॉर्ड भी खंगाले गए। परिवार के फोन कॉल और मैसेज की जानकारी भी जांच के दायरे में लाई गई है।

कोचिंग संस्थान भी जांच के घेरे में

जांच एजेंसी छात्रा के पुणे स्थित एक कोचिंग संस्थान से जुड़े संबंधों की भी जांच कर रही है। बताया गया कि छात्रा परीक्षा से पहले करीब 15 दिन तक वहां रुकी थी। एक निजी कोचिंग संस्थान ने परीक्षा परिणाम आने से पहले ही सफल छात्रों की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए थे। इन पोस्टरों पर “The Results To Come” जैसी टैगलाइन लिखी गई थी। अब एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन दावों का पेपर लीक से कोई संबंध था।

बड़े नेटवर्क की आशंका

जांचकर्ताओं को शक है कि कुछ अभिभावकों ने खुद फायदा लेने के बाद लीक हुआ पेपर दूसरे लोगों तक भी पहुंचाया हो सकता है। CBI को लगता है कि यह पूरा नेटवर्क पुणे, लातूर, नांदेड़ और आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ था। कुछ मामलों में 10 लाख से 25 लाख रुपये तक के लेन-देन की बात भी सामने आई है।

आगे और बढ़ सकती है जांच

इस मामले में CBI पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें कथित मास्टरमाइंड, पेपर हल करने वाले और बिचौलिए शामिल हैं। अब एजेंसी उन लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने जानबूझकर लीक हुए पेपर का फायदा उठाया। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और भी कई जगहों पर छापेमारी हो सकती है।

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