पश्चिम बंगाल के नेता Suvendu Adhikari के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ हत्याकांड की जांच अब Central Bureau of Investigation यानी सीबीआई के हाथों में है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी बनाई है।
इस सात सदस्यीय टीम की अगुवाई डीआईजी पंकज सिंह कर रहे हैं। टीम में दो एसपी रैंक के अधिकारी, तीन डीएसपी रैंक के अधिकारी और एक इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। जांच एजेंसियां अब हत्या के पीछे की पूरी साजिश को समझने की कोशिश कर रही हैं।
हत्या में करोड़ों खर्च होने की आशंका
पुलिस का मानना है कि इस हत्या को अंजाम देने के पीछे किसी बड़े आर्थिक नेटवर्क का हाथ हो सकता है। जांच में यह बात सामने आई है कि पूरी साजिश पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए गए हो सकते हैं।
बताया जा रहा है कि शूटरों को सुपारी देने, उनके लिए बाइक और कार की व्यवस्था करने और वारदात के बाद उन्हें सुरक्षित भगाने तक के लिए बड़ी रकम खर्च की गई। जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि हत्या में इस्तेमाल की गई बंदूकें काफी महंगी थीं। ब्लैक मार्केट में उनकी कीमत 10 लाख रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।
तीन शार्प शूटर गिरफ्तार
इस मामले में अब तक तीन शूटरों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मयंक राज, विक्की मौर्य और राज सिंह के नाम शामिल हैं। मयंक राज और विक्की मौर्य को बिहार के बक्सर से पकड़ा गया, जबकि उत्तर प्रदेश के बलिया निवासी राज सिंह को अयोध्या से गिरफ्तार किया गया। विपक्ष का दावा है कि राज सिंह के भाजपा नेताओं से संबंध हैं। हालांकि इसको लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यूपीआई पेमेंट से खुला सुराग
पुलिस को इस मामले में अहम सुराग यूपीआई पेमेंट से मिला। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने हावड़ा के बाली टोल प्लाजा पर डिजिटल पेमेंट किया था। उसी ट्रांजैक्शन को ट्रेस करते हुए पुलिस इन तीनों आरोपियों तक पहुंची।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर चंद्रनाथ रथ की हत्या करवाने के पीछे कौन था और इसके लिए पैसा किसने दिया। सीबीआई अब इस एंगल पर गहराई से जांच कर रही है।
चुनाव के बाद हुई थी हत्या
बताया जा रहा है कि 4 मई को पश्चिम बंगाल में चुनाव के नतीजे आए थे, जिसमें भाजपा को जीत मिली थी। इसके दो दिन बाद यानी 6 मई की रात चंद्रनाथ रथ अपनी कार से कहीं जा रहे थे।
इसी दौरान एक कार और दो बाइक उनका पीछा करने लगीं। कोलकाता एयरपोर्ट से करीब सात किलोमीटर दूर हमलावरों ने उन पर तीन गोलियां चलाईं। गोली लगते ही उनकी मौके पर मौत हो गई।
इस हत्या के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। भाजपा इसे सुनियोजित हत्या बता रही है, जबकि विपक्ष आरोपी के भाजपा से जुड़े होने का दावा कर रहा है।










