Lucknow Coaching Center Fire Case: लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में 15 छात्रों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। अब सामने आ रही जानकारी के अनुसार, जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी, उसे करीब 10 साल पहले अवैध निर्माण के मामले में गिराने का आदेश दिया गया था। अगर उस समय कार्रवाई पूरी कर दी जाती, तो शायद यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।
रिहायशी भवन में चल रहा था कोचिंग सेंटर
सरकारी जानकारी के मुताबिक, जिस भवन में आग लगी, उसका नक्शा आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था। यानी इस इमारत का इस्तेमाल रहने के लिए होना था। इसके बावजूद यहां कोचिंग सेंटर संचालित किया जा रहा था, जो नियमों के खिलाफ माना जाता है। आवासीय और व्यावसायिक भवनों के लिए अलग-अलग नियम होते हैं। किसी भवन में व्यावसायिक गतिविधि चलाने के लिए विशेष अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होता है। लेकिन इस मामले में नियमों की अनदेखी की गई, जिसका खामियाजा मासूम छात्रों को भुगतना पड़ा।
गिराने का आदेश क्यों हुआ रद्द?
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, वर्ष 2016 में इस भवन के खिलाफ अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई शुरू हुई थी। जांच के बाद 10 मई 2016 को भवन को ध्वस्त करने का आदेश भी जारी किया गया था। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि दो महीने से भी कम समय में 5 जुलाई 2016 को यह आदेश वापस ले लिया गया। बताया जा रहा है कि इस दौरान भवन की संरचना में कोई बड़ा बदलाव भी नहीं किया गया था। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन कारणों से यह आदेश रद्द किया गया।
भवन मालिक के खिलाफ दर्ज हुआ था मामला
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अलीगंज सेक्टर-डी स्थित यह संपत्ति वर्ष 1980 में विजय कुमार को लॉटरी प्रणाली के तहत आवंटित की गई थी। बाद में यह संपत्ति कई बार खरीदी और बेची गई। साल 2014 में लगभग 1992 वर्गफुट क्षेत्र में बने इस भवन का नक्शा आवासीय उपयोग के लिए मंजूर किया गया था। इसके बाद भवन में कथित तौर पर नियमों के विपरीत निर्माण किए जाने की जानकारी सामने आई। इसी आधार पर लखनऊ विकास प्राधिकरण ने वर्ष 2016 में भवन मालिक के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
आग लगने के बाद मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के बाद भवन में फंसे कई लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊपर से कूद गए। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही समय में पूरी इमारत इसकी चपेट में आ गई।
भवन में एक पालतू पशु क्लिनिक भी संचालित हो रहा था। दोपहर करीब 3 बजे लगी आग को बुझाने के लिए हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म वाहन सहित 14 दमकल गाड़ियों को मौके पर लगाया गया।
पुलिस ने शुरू की सख्त कार्रवाई
हादसे के बाद पुलिस और प्रशासन एक्शन मोड में आ गए हैं। मामले की जांच के बाद भवन मालिकों समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार लोगों में राम कृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। इनमें से कुछ लोग भवन के संयुक्त मालिक बताए जा रहे हैं। प्रशासन अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है ताकि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
