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BSP Succession: शून्य पर खड़ी बसपा में उत्तराधिकारी की तलाश तेज, क्यों है आकाश के बाद ईशान पर नजर

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में नेतृत्व और उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज है। आकाश आनंद पर कार्रवाई के बाद मायावती उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों के लिहाज से शून्य पर चल रही बहुजन समाज पार्टी में चुनाव से पहले सबकुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है। पार्टी प्रमुख मायावती के हालिया फैसलों के बाद संगठन और समर्थकों के बीच उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पहले कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं, लेकिन बाद में उनसे जिम्मेदारी वापस ली और आखिरकार पार्टी से बाहर कर दिया। अब छोटे भतीजे ईशान को संगठन की अगली कतार में आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तराधिकारी का सवाल अहम कांशीराम के बाद बसपा की कमान संभालने वाली मायावती करीब 23 वर्षों से पार्टी की सबसे बड़ी नेता हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उनके बाद पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी, यह सवाल लगातार अहम होता जा रहा है। आकाश को बार-बार मौका दिए जाने के बाद अब ईशान को आगे करना भी इसी राजनीतिक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि मायावती की राजनीतिक विरासत आखिर किसे मिलेगी। आकाश पर फिर कार्रवाई विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में परिवार से जुड़े फैसले भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीतिक गतिविधियों से दूर होने के लिए कहा। इसके बाद आकाश को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया। एक तरफ आकाश और उनके ससुर पर कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर ईशान को संगठन में आगे लाया जा रहा है। इसे मायावती की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि आकाश की राजनीतिक पारी पूरी तरह खत्म हो गई है, ऐसा मानना अभी जल्दबाजी होगी। मायावती उन्हें पहले भी कई मौके दे चुकी हैं। इसलिए भविष्य में उन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। पुराने नेताओं का अनुभव मायावती के राजनीतिक सफर में दूसरी पंक्ति के नेताओं को लेकर भी कई बार सवाल उठे हैं। कभी उनके करीबी रहे कई बड़े नेता बाद में बसपा से अलग हो गए। इनमें गया चरण दिनकर, आरके चौधरी, स्वर्गीय डॉ. सोनेलाल पटेल, लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा, इंद्रजीत सरोज और स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नाम शामिल हैं। ऐसे में ईशान को आगे बढ़ाने का फैसला केवल परिवार में उत्तराधिकारी चुनने की कवायद नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए संगठन पर पकड़ बनाए रखने और भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की कोशिश भी देखी जा रही है। ईशान के सामने बड़ी चुनौती अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईशान बसपा के लिए कितना प्रभावी युवा चेहरा साबित होते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें जिम्मेदारी मिलना एक बात है, लेकिन संगठन से बाहर अपनी राजनीतिक पहचान बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी। खासकर दलित और पिछड़े वर्ग के युवा मतदाताओं के बीच जगह बनाना आसान नहीं होगा। मिशन-2027 में दूसरे दल भी युवा मतदाताओं और जेन-जी वोटरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेंगे। ऐसे में ईशान के सामने सिर्फ मायावती की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि बदलते युवा मतदाता वर्ग के बीच बसपा की खोई जमीन वापस हासिल करने की भी बड़ी परीक्षा होगी।छोटे भतीजे ईशान को संगठन में आगे बढ़ा रही हैं।

by SYED BUSHRA
सितम्बर 11, 2026
in राष्ट्रीय
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BSP Political Succession: उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों के लिहाज से शून्य पर चल रही बहुजन समाज पार्टी में चुनाव से पहले सबकुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है। पार्टी प्रमुख मायावती के हालिया फैसलों के बाद संगठन और समर्थकों के बीच उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मायावती ने अपने बड़े भतीजे आकाश आनंद को पहले कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दीं, लेकिन बाद में उनसे जिम्मेदारी वापस ली और आखिरकार पार्टी से बाहर कर दिया। अब छोटे भतीजे ईशान को संगठन की अगली कतार में आगे बढ़ाया जा रहा है।

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उत्तराधिकारी का सवाल अहम

कांशीराम के बाद बसपा की कमान संभालने वाली मायावती करीब 23 वर्षों से पार्टी की सबसे बड़ी नेता हैं। उम्र के इस पड़ाव पर उनके बाद पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी, यह सवाल लगातार अहम होता जा रहा है।

आकाश को बार-बार मौका दिए जाने के बाद अब ईशान को आगे करना भी इसी राजनीतिक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि मायावती की राजनीतिक विरासत आखिर किसे मिलेगी।

आकाश पर फिर कार्रवाई

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा में परिवार से जुड़े फैसले भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मायावती ने आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीतिक गतिविधियों से दूर होने के लिए कहा। इसके बाद आकाश को भी पार्टी से बाहर कर दिया गया।

एक तरफ आकाश और उनके ससुर पर कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर ईशान को संगठन में आगे लाया जा रहा है। इसे मायावती की भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि आकाश की राजनीतिक पारी पूरी तरह खत्म हो गई है, ऐसा मानना अभी जल्दबाजी होगी। मायावती उन्हें पहले भी कई मौके दे चुकी हैं। इसलिए भविष्य में उन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

पुराने नेताओं का अनुभव

मायावती के राजनीतिक सफर में दूसरी पंक्ति के नेताओं को लेकर भी कई बार सवाल उठे हैं। कभी उनके करीबी रहे कई बड़े नेता बाद में बसपा से अलग हो गए।

इनमें गया चरण दिनकर, आरके चौधरी, स्वर्गीय डॉ. सोनेलाल पटेल, लालजी वर्मा, रामअचल राजभर, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, बाबू सिंह कुशवाहा, इंद्रजीत सरोज और स्वामी प्रसाद मौर्य समेत कई नाम शामिल हैं।

ऐसे में ईशान को आगे बढ़ाने का फैसला केवल परिवार में उत्तराधिकारी चुनने की कवायद नहीं माना जा रहा है। इसके जरिए संगठन पर पकड़ बनाए रखने और भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने की कोशिश भी देखी जा रही है।

ईशान के सामने बड़ी चुनौती

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईशान बसपा के लिए कितना प्रभावी युवा चेहरा साबित होते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें जिम्मेदारी मिलना एक बात है, लेकिन संगठन से बाहर अपनी राजनीतिक पहचान बनाना उनके लिए बड़ी चुनौती होगी।

खासकर दलित और पिछड़े वर्ग के युवा मतदाताओं के बीच जगह बनाना आसान नहीं होगा। मिशन-2027 में दूसरे दल भी युवा मतदाताओं और जेन-जी वोटरों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करेंगे।

ऐसे में ईशान के सामने सिर्फ मायावती की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि बदलते युवा मतदाता वर्ग के बीच बसपा की खोई जमीन वापस हासिल करने की भी बड़ी परीक्षा होगी।

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