Religious News:गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ दस दिवसीय गणपति उत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ संपन्न होता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें श्रद्धा एवं भक्ति के साथ विदाई देते हैं। गणपति विसर्जन के दौरान शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है।
बप्पा के विसर्जन के शुभ समय को लेकर एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा ने जानकारी दी है। उनके अनुसार, 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश विसर्जन के लिए चार शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इन समयों में विसर्जन कर सकते हैं।
गणेश विसर्जन के चार शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा के मुताबिक, अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश के विसर्जन के लिए अलग-अलग समय शुभ माने गए हैं। इन मुहूर्तों में श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार बप्पा को विदाई दे सकते हैं।
सुबह 6:11 बजे से 10:42 बजे तक: चर, लाभ और अमृत मुहूर्त।
दोपहर 12:13 बजे से 1:44 बजे तक: शुभ मुहूर्त।
शाम 4:45 बजे से 6:15 बजे तक: चर मुहूर्त।
रात 9:14 बजे से 10:44 बजे तक: लाभ मुहूर्त।
विसर्जन से पहले ऐसे करें गणपति की पूजा
गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा करने की परंपरा है। सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, फल, मिठाई और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद गणपति जी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
पूजा के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश से जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांग सकते हैं। इसके लिए पूजा के अंत में क्षमा याचना की जाती है। पूजा संपन्न होने के बाद बप्पा को श्रद्धापूर्वक विदाई दी जाती है।
गणपति विसर्जन के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान
गणेश विसर्जन भक्तों के लिए भावनात्मक और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर होता है। मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश को अतिथि के रूप में घर लाने के बाद अनंत चतुर्दशी पर विदाई दी जाती है।
ज्योतिषाचार्य चंद्रेश शर्मा के बताए नियमों के अनुसार, विसर्जन से पहले गणेश प्रतिमा को उसके स्थान से थोड़ा हिलाया जा सकता है। इसके बाद बप्पा को भोग अर्पित करें और एक विशेष पोटली तैयार करें। इसमें भगवान गणेश की प्रिय वस्तुएं रखने की धार्मिक परंपरा का पालन किया जाता है।
विसर्जन के दौरान श्रद्धा और शांति बनाए रखें। पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के अनुसार विसर्जन करें। श्रद्धालु धार्मिक भावनाओं के साथ उत्सव का समापन कर सकते हैं।
Disclaimer:इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं पर आधारित है। मुहूर्त स्थानीय पंचांग के अनुसार बदल सकता है। पाठक किसी भी निर्णय से पहले अपने विवेक और विशेषज्ञ की सलाह का उपयोग करें।






