Kanpur Yashi Accident:कानपुर के महाराजपुर क्षेत्र के पुरवामीर गांव में रक्षाबंधन का त्योहार एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन गया। 18 वर्षीय यशी घर के आंगन में अचानक बनी करीब 25 फीट गहरी खाई में समा गई। देखते ही देखते परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। कई घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यशी का शव बाहर निकाला जा सका। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है।
बहन आंखों के सामने
यशी चार बहनों और एक भाई में सबसे छोटी थी। उसकी बड़ी बहन अनूपा रक्षाबंधन पर मायके आई हुई थी। बहन की आंखों के सामने ही यशी गहरे गड्ढे में गिर गई। अनूपा का रो-रोकर बुरा हाल है। वह मां से लिपटकर बार-बार यही कह रही थी कि अगर यशी रस्सी पकड़ लेती तो वह उसे बाहर खींच लेती। इस हादसे ने पूरे परिवार को अंदर तक तोड़ दिया है।
अधूरे रह गए सपने
यशी ने पिछले साल ही इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। उसे सजने-संवरने का काफी शौक था और वह कुछ समय से ब्यूटी पार्लर का कोर्स भी कर रही थी। पिता विनोद ने बताया कि परिवार ने सोचा था कि अगले साल बेटी के लिए अच्छा रिश्ता तलाशकर उसकी शादी करेंगे। जिस आंगन में बेटी की शादी का मंडप सजाने के सपने देखे थे, वहीं अब उसकी मौत का मातम पसरा है।
भाई ने खोई बहन
यशी के इकलौते भाई भास्कर के लिए भी यह रक्षाबंधन कभी न भूलने वाला दुख बन गया। वह छुट्टी लेकर बहन से राखी बंधवाने के लिए घर आया था, लेकिन उसे क्या पता था कि कुछ ही देर में परिवार की सबसे छोटी बेटी हमेशा के लिए चली जाएगी। भास्कर ने कहा कि यशी ही घर में शादी के लिए बची थी। जिस बहन की डोली को कंधा देना था, अब उसकी अर्थी को कंधा देना पड़ा।
बोरिंग से हादसा
परिवार और ग्रामीणों के मुताबिक, करीब एक साल पहले घर के आंगन में दो जगह 10-10 फीट की बोरिंग कराई गई थी। पानी नहीं मिलने पर करीब 10 मीटर दूर गली के पास भी बोरिंग कराई गई। आंगन की बोरिंग को बाद में सीमेंट से बंद कर दिया गया था। हादसे से तीन दिन पहले जमीन का कुछ हिस्सा धंसा हुआ दिखाई दिया था, जिसे परिवार ने मिट्टी डालकर बराबर कर दिया था। आशंका है कि बोरिंग के कारण जमीन के भीतर मिट्टी धीरे-धीरे खिसकती रही और अचानक बड़ा गड्ढा बन गया।
घर तोड़कर बचाव
यशी को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आंगन में जेसीबी और पोकलैंड जैसी भारी मशीनें पहुंचाने की जगह नहीं थी। इसके चलते बचाव अभियान के लिए घर के कई हिस्सों को तोड़ना पड़ा। बरामदा, टिन शेड, सीढ़ी और बाथरूम तक हटाए गए, ताकि मशीनों और बचाव दल को गड्ढे तक पहुंचने का रास्ता मिल सके। घंटों की मशक्कत के बाद यशी को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक परिवार अपनी बेटी को खो चुका था।









