Gold Seizure: वाराणसी के पंडित दीनदयाल उपाध्याय यानी पीडीडीयू जंक्शन पर 23 जुलाई की शाम ब्रह्मपुत्र मेल से करीब पांच किलो सोने के बिस्किट के साथ गिरफ्तार मधु देवी वर्मा से पूछताछ में तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। बरामद सोने की कीमत सात करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। पूछताछ के दौरान सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन बंगाल का रहने वाला जगदीश करता है। राजस्व आसूचना निदेशालय यानी डीआरआइ की टीम अब मामले की गहराई से जांच कर रही है।
पति भी गिरोह का हिस्सा
जांच में पता चला है कि मधु देवी वर्मा और उसका पति मनोज वर्मा कथित तौर पर इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। एजेंसियों के अनुसार, मधु और मनोज पहले भी जगदीश के निर्देश पर कई बार सोने की खेप अलग-अलग स्थानों तक पहुंचा चुके हैं। अब जांच एजेंसियां जगदीश और मनोज की तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि दोनों की गिरफ्तारी से नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और तस्करी के पूरे सिस्टम के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
विदेश से आता था सोना
जांच एजेंसियों के मुताबिक, नेटवर्क का मुख्य संचालक जगदीश बांग्लादेश के रास्ते विदेश से सोना भारत में मंगवाता था। इसके बाद तस्करी के नेटवर्क में शामिल लोगों के जरिए सोने की खेप देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाई जाती थी। मधु की गिरफ्तारी और उसके पास से करोड़ों रुपये का सोना बरामद होने के बाद ट्रेनों के जरिए सोने की तस्करी के बदलते तरीके का भी पता चला है। अब एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
तस्करों ने बदला तरीका
जांच में यह भी सामने आया है कि तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए यात्रा का तरीका बदल दिया है। पहले आरक्षण चार्ट के जरिए संदिग्ध यात्रियों की पहचान करना अपेक्षाकृत आसान होता था। पुलिस और जांच एजेंसियां आरक्षित सीट और कोच की जानकारी के आधार पर यात्रियों तक पहुंच जाती थीं। लेकिन अब तस्कर जनरल टिकट लेकर एसी कोच में यात्रा करने लगे हैं। इससे उनकी पहचान करना और निगरानी रखना पहले की तुलना में मुश्किल हो गया है। राजधानी एक्सप्रेस और ब्रह्मपुत्र मेल से जुड़े हालिया मामले इस नए तरीके की ओर इशारा करते हैं।
ट्रेनों पर एजेंसियों की नजर
राजधानी एक्सप्रेस में बिना टिकट एसी कोच में सफर कर रहा एक कथित सोना तस्कर वाराणसी में पकड़ा गया था। इसके बाद ब्रह्मपुत्र मेल के एसी कोच से मधु देवी वर्मा को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास भी जनरल टिकट था। इन दोनों मामलों ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। अब अधिकारी ट्रेनों के जरिए सोने की तस्करी के इस नए तरीके की कड़ियां जोड़ने में जुटे हैं, ताकि नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचा जा सके।
ठिकाना बदलकर रहती थी मधु
पूछताछ के दौरान मधु ने जांच अधिकारियों को बताया कि वह पहले पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में रहती थी। वहां भी वह पुलिस और जांच एजेंसियों की नजर से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदलती रहती थी। पिछले कुछ महीनों से उसने कूचबिहार में किराये का मकान लिया था और वहीं रह रही थी। अब डीआरआइ की टीम उसके बयानों के आधार पर तस्करी नेटवर्क की अन्य कड़ियों को खंगाल रही है। एजेंसी की जांच आगे बढ़ने के साथ इस गिरोह से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।







