Jyoti Murder Case: कानपुर के चर्चित ज्योति हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका ज्योति के पिता शंकर नागदेव ने आरोप लगाया है कि उम्रकैद की सजा होने के बावजूद आरोपित पति पीयूष श्यामदासानी को अब तक सेंट्रल जेल नहीं भेजा गया है। उन्होंने जेल प्रशासन पर पीयूष के प्रति कथित तौर पर नरमी बरतने का आरोप लगाया है। शंकर नागदेव का कहना है कि उन्होंने इस मामले को लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत की और पत्राचार भी किया, लेकिन उनकी शिकायतों पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
तीनों जेल पहुंचे
ज्योति के पिता का कहना है कि मामले में दोषी ठहराए गए अन्य अभियुक्तों को पहले ही सेंट्रल जेल भेजा जा चुका है। इनमें रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और अन्य अभियुक्त शामिल हैं। उनका सवाल है कि जब अन्य दोषियों को सजा के बाद सेंट्रल जेल भेज दिया गया, तो पीयूष श्यामदासानी के मामले में अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई जा रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस मामले में स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग की है।
ऐसे हुई थी हत्या
पांडुनगर निवासी बिस्किट कारोबारी पीयूष श्यामदासानी 27 जुलाई 2014 को अपनी पत्नी ज्योति उर्फ पूजा के साथ पार्वती बागला रोड स्थित वरांडा रेस्टोरेंट गया था। रात करीब 11:30 बजे पीयूष ने पुलिस को सूचना दी कि कुछ लोगों ने उसके साथ मारपीट की और उसे कार से बाहर फेंकने के बाद ज्योति का अपहरण कर लिया। इसके बाद पुलिस ने देर रात कल्याणपुर-पनकी रोड से एक कार में ज्योति का शव बरामद किया था। उसकी चाकू से गोदकर हत्या की गई थी।
छह आरोपी गिरफ्तार
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पीयूष श्यामदासानी समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपितों में पान मसाला कारोबारी की बेटी मनीषा मखीजा, चालक अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप के नाम शामिल थे। इस चर्चित हत्याकांड ने कानपुर में काफी सुर्खियां बटोरी थीं और लंबे समय तक यह मामला चर्चा में रहा था।
कोर्ट ने सुनाई सजा
कानपुर के सत्र न्यायालय ने 20 अक्टूबर 2022 को मामले में पीयूष श्यामदासानी समेत अन्य आरोपितों को दोषी करार दिया था। अदालत ने सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद चालक अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को सेंट्रल जेल भेजा जा चुका है। वहीं, ज्योति के पिता का आरोप है कि पीयूष को अब तक सेंट्रल जेल नहीं भेजा गया है।
जेल प्रशासन का जवाब
जेल अधीक्षक राजेश कुमार पांडेय ने इस मामले में बताया कि सात साल से अधिक की सजा पाने वाले कैदी को सामान्य तौर पर सेंट्रल जोन भेजा जाता है। हालांकि, यदि किसी कैदी से जुड़ा कोई मामला लंबित होता है तो ऐसी स्थिति में उसे सेंट्रल जेल नहीं भेजा जाता। अब इसी नियम के आधार पर पीयूष को सेंट्रल जेल नहीं भेजे जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, मृतका के पिता इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हैं और उन्होंने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।









