Cancer Treatment: ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में एक महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जेनेटिक जांच विकसित की है, जो यह पहचानने में मदद करती है कि किन मरीजों को वास्तव में कीमोथेरेपी की जरूरत है और कौन बिना कीमोथेरेपी के भी सुरक्षित रूप से इलाज करा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक से शुरुआती चरण के ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लगभग दो-तिहाई महिलाएं कीमोथेरेपी से बच सकती हैं।
क्या है नया जेनेटिक टेस्ट?
यह डीएनए आधारित जांच ट्यूमर में मौजूद कैंसर से जुड़े जीनों की गतिविधि को मापती है। जांच के बाद एक स्कोर तैयार किया जाता है, जो बताता है कि कैंसर कितना आक्रामक है और भविष्य में उसके दोबारा लौटने की संभावना कितनी है।
कम स्कोर का मतलब होता है कि कैंसर का जोखिम अपेक्षाकृत कम है। ऐसे मामलों में सर्जरी, रेडियोथेरेपी और हार्मोनल थेरेपी पर्याप्त हो सकती है। वहीं, अधिक स्कोर वाले मरीजों को कीमोथेरेपी की सलाह दी जा सकती है।
4,400 से ज्यादा मरीजों पर अध्ययन
यह शोध यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के नेतृत्व में किए गए OPTIMA ट्रायल का हिस्सा है। इसमें 40 वर्ष या उससे अधिक आयु की 4,400 से ज्यादा महिलाओं को शामिल किया गया।
मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह में उपचार का निर्णय पारंपरिक चिकित्सा मानकों के आधार पर लिया गया, जबकि दूसरे समूह में जीन टेस्ट के नतीजों का उपयोग किया गया। इसके बाद कई वर्षों तक मरीजों की निगरानी की गई।
सर्वाइवल रेट में मामूली अंतर
अध्ययन में पाया गया कि जिन मरीजों ने कीमोथेरेपी नहीं ली, उनका पांच वर्षीय सर्वाइवल रेट 93.7 प्रतिशत रहा। वहीं, कीमोथेरेपी लेने वाले समूह में यह आंकड़ा 94.9 प्रतिशत था।
शोधकर्ताओं के अनुसार दोनों समूहों के बीच अंतर बहुत कम है, जबकि कीमोथेरेपी से जुड़े कई गंभीर दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह शोध?
कीमोथेरेपी के कारण बाल झड़ना, मतली, अत्यधिक थकान, संक्रमण का खतरा और प्रजनन क्षमता पर असर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में Prosigna जैसे जेनेटिक टेस्ट उन मरीजों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं जिन्हें कीमोथेरेपी से विशेष लाभ नहीं मिलने वाला है।









